Wednesday, 5 December 2018

Birthday Special

उम्र एक साल बेशक़ बढ़ी  है,
ज़िंदादिली अभी भी वही है

मुश्किलों से लड़ने का हौसला कल भी था
खतरों से खेलने का जूनून आज भी है

उम्र एक साल बेशक़ बढ़ी  है,
.....

कोई हमसे सीखे खुल के जीना
वैसे तो जिंदगी में कमियां कई है

उम्र एक साल बेशक़ बढ़ी  है,
.....

हम नहीं डरते शाम के अँधेरे से
के जानते है होनी कल सुबह एक नई है

उम्र एक साल बेशक़ बढ़ी  है,
.....

तज़ुर्बा कमाया है, संजीदगी नहीं
के बचपना हममें आज भी वही है

उम्र एक साल बेशक़ बढ़ी  है,
.....

जिंदगी  रास्ते में कई रिश्तें जोड़े है,
पर पुराने रिश्तों को भुलाया नहीं है

उम्र एक साल बेशक़ बढ़ी  है,
.....

बहुत रोका है, टोका है, ज़माने ने हमको
पर हमनें अपना अंदाज़ बदला नहीं है

उम्र एक साल बेशक़ बढ़ी  है,
ज़िंदादिली अभी भी वही है

Tuesday, 20 September 2016


आम आदमी

वही सुबह होती है और वैसी ही शाम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है
चाहे बचपन की पढाई,जवानी का पेशा या भुढापे का सत्संग हो
अपनी ज़िन्दगी अपनी नहीं किसी और ही के नाम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है
सपने भी इतने छोटे की खुद की भी नज़र नहीं आते
फिर रोज़ की उठा पटक में बस ज़िन्दगी बदनाम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है

JHANSI KI RANI

वो देश की थी बेटी
जो किसी से ना डरी
अपने लोगों के लिए
अंग्रेजो से जा लड़ी

आज़ादी की आशा
दिल में जिसने जगाई
ऐसी वीरांगना युवती थी
रानी लष्मी बाई


Today I Will Tell about
A Very Brave lady
This is real story
So you better be ready

Daughter of nation
Not afraid of anyone
With a mere sword
Stood in front of English gun

She challenged injustice
She challenged English rule
A Lady against an army
Isn't it cool

With her courage and bravery
Hopes of freedom were high
Such a strong lady was
RANI LAXMI BAI

मुमकिन नहीं

कह दो कह दो ना
जो भी है दिल में सनम
देखो देखो ना कभी फुर्सत से मिल के सनम
कितना प्यार है ये बताना ही मुमकिन नहीं
कैसे कहूँ तुझसे दूर जाना ही मुमकिन नहीं
तू है मेरी ये झुठलाना ही मुमकिन नहीं
मुमकिन नहीं
मुमकिन नहीं
मुमकिन नहीं

हम एक हैं

कौन जाने फिर कहाँ हम कब मिले
रोज़ होते नहीं ये सिलसिले

आज जो मिले तो एक दूसरे में हम खो जाएं
दुनिया समझे दो है हम पर एक हम हो जाए 

मैं हूँ तू हैं , तू हैं मैं हूँ फिर क्या कमी सनम
तू है मेरा आसमां और मैं तेरी ज़मीं सनम

तेरी सांसें मेरी साँसें एक हो जाए सनम
फासले  कुछ ना रहे आ के लग जा तू गले

कौन जाने फिर कहाँ हम कब मिले
रोज़ होते ही नहीं प्यार के सिलसिले

तेरे लब और मेरे लब दोनों हैं खामोश से
तूने मुझको मैंने तुझको भर लिया आगोश में

मैं ना जानू तू ना जाने प्यार कैसे हो गया
जबसे देखा तुझको चैन दिल का खो गया

रास्ता हो कितना लंबा कितनी भी हो मुश्किलें
वादा करले आ सनम ज़िन्दगी भर संग चले

कौन जाने फिर कहाँ हम कब मिले
रोज़ होते ही नहीं ये सिलसिले

कौन जाने फिर कहाँ हम कब मिले
रोज़ होते ही नहीं ये सिलसिले

आज जो मिले तो एक दूसरे में हम खो जाएं
दुनिया समझे दो है हम पर एक हम हो जाए 


Monday, 11 January 2016

Doreamon

Come On Come On
I am Doreamon
My eyes are big, My Dress is Blue
I'm here to Help You

Friday, 5 December 2014

मेरा वज़ूद


मेरा वज़ूद, मेरा निशाँ
मेरी हक़ीक़त मुझे ना पता
मैं कौन हूँ कोई दे बता
मेरी हक़ीक़त मुझे ना पता

बर्फ़ हूँ भाप हूँ
या फिर मैं पानी हूँ
जिस्म हूँ, रूह हूँ
फ़ानी हूँ या लाफ़ानी हूँ

ना मक़सद है ना मंज़िल
ना है मेरा कोई रास्ता
ये जमीं है मेरी या आसमाँ
कोई पता है या हूँ लापता

मेरी हकीकत कोई दे बता

कतरा कतरा टुकड़ा टुकड़ा
हर ज़मी बिक गई
आसमां में भी पता है
अब तलक नहीं कोई रास्ता
ना नगर पता ना डगर पता
रहता कहाँ है तू खुदा

मेरी हकीकत मुझे दे बता

सारी उमर ढूँढा तुझे
कुछ ना पाया मेरे खुदा
ढूंढना है तो ढूंढो
अपने अंदर ही खुदा को
अमन की ऐसी मिस्साल बने
की हर दिल में मुहब्बत का दिया हो

Thursday, 15 December 2011

ख्वाहिश

ज़िन्दगी के हर मोड़ पर एक ख्वाहिश रहती है,
खुदा बक्श दे वोह ख्वाहिश , तो एक नई ख्वाहिश जगती है,
जब कुछ नहीं था हासिल, तो सुकून था ज़िन्दगी में,
आज मक़ाम पाया है, तो भी कुछ कमी रहती है,
किस कदर ज़िन्दगी के फेर में घिरता जा रहा हूँ मै,
कहाँ से चला था, और आज कहाँ हूँ मै,

रह-रह कर याद आते है बचपन के आज़ाद दिन,
अपनापन तो है यहाँ भी, पर अपनों की कमी खलती है,
जाने किस तरह रह लेते है लोग वतन से दूर,
मेरा वतन ही मेरा दिल है, कैसे रहूँ धड़कन से दूर,

जाने क्यों घुटन से महसूस होती है इस माहौल में,
अपने हिस्से की हवा तो शायद, अपने वतन में ही रहती है,
मेरा घर, मेरा आँगन, मेरे दोस्त, वोह माँ का प्यार,
जाने इनके वास्ते कसा होगा और कितना इंतज़ार,

बहुत कुछ कमाया है तूने, पर क्या तुझे मेरी याद नहीं आती मेरी,
एक बार आकर मिल जा मुझसे, माँ की ख़ामोशी यही कहती है,
जाने क्या दे पाएंगे हम अगली पीढ़ी को विरासत में,
अपने रिवाज़ तक भूल चुके है ज़िन्दगी की जेद्दोजेहद में,
ज़िन्दगी तौ नियामत है खुदा की, बुजुर्गो ने यही सिखाया हमेशा,
अब तो ये ज़िन्दगी भी बोझ सी लगती है,






























Sunday, 18 September 2011

सिर्फ तुम

सागर में खुद को डुबो के चाहा, तेरे दर्द से उबर जाये हम,
सागर भी तेरे दर्द के आगे कम था, ऐ मेरे मौला अब किधर जाये हम,

इस कदर तुझमे समां गयी थी मेरी ज़िन्दगी,
यहाँ भी तुम थे, मेरे लिए वहां भी तुम थे,
तेरे बगैर क्या होगा मेरा, मेरे हमदर्द,
मेरी ज़मीं भी तुम थे, मेरे आसमां भी तुम थे,  
मेरे हर दिन, हर रात, हर बात तुमसे थी,  
मेरा दर्द भी तुम थे, मेरी दवा भी तुम थे,
तेरी वफ़ा पे नाज़ था, तेरी बेवफाई ने दिल तोड़ दिया,
बावफा भी तुम थे, बेवफा भी तुम थे,

अब तो तेरा चेहरा भी भूलने लगा है,
इश्क करने की यह कैसी सजा है,
हमेशा चाहा तू मेरे साथ रहे हरदम,
पर जाने क्यूँ तू मुझसे जुदा है,
ऐ खुदा मेरा माही लौटा दे मुझे,
कम से कम मेरा माही मुझसे जुड़ा है,
एक अरसे से तेरी यादों में जी रहा हूँ,
दुनिया में क्या हुआ, मुझको क्या पता है,
मेरी ख़ामोशी का सबब न पूछो मुझसे,
मुझपर तेरी बेवफाई का जाम लगा है,
दिल इस कदर तेरी यादों को भूलना चाहता है,
कि तुझे भूलने के लिए भी तुझको याद करता रहा है,

और भी गम है ज़माने में मोहब्बत के सिवा,
पर यकीं जानो, मोहब्बत से बढ़कर गम कोई नहीं,
ज़िन्दगी खुशगवार होगी, तो हमदम ही हमदम होगे,
जब गम का साया होगा, तो जानोगे हमदम कोई नहीं,





तुम...

तुम न हो तो कभी सवेरा न हो,
जो तुम न हो तो मेरी रातें नहीं,

एक पल भी मेरा ऐसा कभी न गुज़रा, 
जब तुम मुझे याद आते नहीं,

तेरी याद में दिल तड़पता तो है,
पर पता है मुझे, मिलना हैं हमे एक दिन,
तेरा एहसास, तेरी याद, तेरी बातें, मरी हिम्मत हैं,
वरना एक एक दिन, साल सा हैं तेरे बिन,

जो चाहा वोह सब मिला, बस तेरे साथ के सिवा,
क्यों ऐसा है कि अपनी मुलाकाते नहीं,

जो तुम न हो तो मेरी रातें नहीं,



  

मोहब्बत

करीब रहकर भी हमारे दरमियाँ फासला है मीलों लम्बा
क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है
जब किसी को मिल जाता है उसका खुदा, तो आप ही बताइए हुज़ूर
क्या उसकी इबादत कम हो जाती है

क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है

हम ही क्यों न जान पाए मोहब्बत की ताक़त को
सुना था मोहब्बत के आगे हुकूमत कम हो जाती है

क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है

अब तो कोई रिश्ता न रहा तेरे मेरे दरमियाँ 
फिर भी क्यूँ तेरे ज़िक्र पे ये आँखें नाम हो जाती है

क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है

क्या लिखू, क्या कहू...

कैसे लिखू मैं, और क्या लिखू मैं,
न इतने लब्ज़ हैं न ही इतना वक़्त है,

तेरे साथ गुज़रा वोह वक़्त, शायद निचोड़ है मेरी ज़िन्दगी का,
तुझे बताना है तू ही है ज़रिया मेरी हर ख़ुशी का,

कैसे कहू मैं, और क्या कहू मैं,

हाथ हाथो में लेकर घंटो बैठे रहना,
तेरी आँखों में आँखें डालकर कुछ न कहना,

तेरी हथेली की लकीरों में खोजना अपने नाम को,
सुबह की मुलाक़ात के बाद इंतज़ार करना तेरा शाम को!!!


वक़्त!!!

इस कदर वक़्त की कमी होगी सोचा न था,
दौड़ रहे है हम पर ज़िन्दगी थमी होगी सोचा न था,

सोचा था मंजिल पाकर सब पा लेंगे,
मक़ाम पाकर भी ज़िन्दगी मैं कुछ कमी होगी सोचा न था,

बेशक रोज़ सुबह एक नया दिन तो शुरू होता है,
पर ज़िन्दगी में नयापन सा कुछ नहीं,

रोज़ अपने मिलने वालों में अपनों को तलाशता हूँ,
लेकिन पत्थर के इस शहर अपनेपन सा कुछ नहीं,

रातों में अपनों की याद में,
बच्चो सा रोता हूँ मैं!!


Saturday, 17 September 2011

Valentine's Day


तुमको बताना है मेरे लिए ख़ास हो तुम,
मेरी हर जीत हर खुशी का एहसास हो तुम,

यूं तो कुछ ख़ास नही मेरी जिंदगानी में,
पर इस जिंदगानी की ख़ास याद हो तुम,

मुझसे पहले मेरा दर्द जान लेते हो तुम,
मेरी हर जिद को मान लेते हो तुम,

अब डर नही मुझे किसी भी ग़म का,
खुदा का शुक्र है की मेरे पास हो तुम,

तुम्हारे बिना जिंदगी में तनहा हूँ मैं,
तेरा साथ पा कर ही संभला हूँ मैं,

तेरे बिना क्या होगा मेरा मेरे हमसफ़र,
मेरे लिए तो मेरी धरती, मेरा आकाश हो तुम 
 
मेरी हर जीत हर खुशी का एहसास हो तुम,
 

संप्रदायक अयोध्या


अयोध्या का अतीत ही जाने
मंदिर था या मस्जिद थी
पर 92 में जो भी हुआ
वो बस सियासी जिद थी

क्यों लगता है हिन्दू को
की वो खुदा से दूर है
मुसलमान की दिल में भी
भगवान भरपूर है

बेक़सूर और मज़लूमो थे वो
जो मारे गए उस काली जिद में
राम नहीं चाहते ऐसा मंदिर
खुदा भी न बसेंगे ऐसी मस्जिद में

कैसे मिलोगे अपनों से ईद
कैसे जलाओगे दिवाली में दिए
भाईचारा बनाओ राम के वास्ते
मिलजुल के रहो खुदा के लिए

भाईचारा बनाओ राम के वास्ते
मिलजुल के रहो खुदा के लिए

भाईचारा बनाओ राम के वास्ते
मिलजुल के रहो खुदा के लिए

क्या लिखू.....

लिखो, कुछ तो लिखो तुम,
मेरे दिल के कागज़ पर कुछ तो लिखो तुम,
मेरी ख्वाइश है, मेरे दिल के पन्नो में रंग भर दो तुम,
लिखो, कुछ तो लिखो तुम,

क्या पता नहीं तुम्हे, की मरे लिए खास हो तुम,
मेरे आने वाले कल का एहसास हो तुम,
लिखो, कुछ तो लिखो तुम,

पलके मूंदू तो तुम्हे देखू, आँखें खोलू तो तुम्हे सोचू,
जो आ जाओ तुम मेरे सामने, तो तुम्हे भाओं में भर लू,
लिखो, कुछ तो लिखो तुम,