Sunday, 18 September 2011

मोहब्बत

करीब रहकर भी हमारे दरमियाँ फासला है मीलों लम्बा
क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है
जब किसी को मिल जाता है उसका खुदा, तो आप ही बताइए हुज़ूर
क्या उसकी इबादत कम हो जाती है

क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है

हम ही क्यों न जान पाए मोहब्बत की ताक़त को
सुना था मोहब्बत के आगे हुकूमत कम हो जाती है

क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है

अब तो कोई रिश्ता न रहा तेरे मेरे दरमियाँ 
फिर भी क्यूँ तेरे ज़िक्र पे ये आँखें नाम हो जाती है

क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है

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