करीब रहकर भी हमारे दरमियाँ फासला है मीलों लम्बा
क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है
जब किसी को मिल जाता है उसका खुदा, तो आप ही बताइए हुज़ूर
क्या उसकी इबादत कम हो जाती है
क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है
हम ही क्यों न जान पाए मोहब्बत की ताक़त को
सुना था मोहब्बत के आगे हुकूमत कम हो जाती है
क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है
अब तो कोई रिश्ता न रहा तेरे मेरे दरमियाँ
फिर भी क्यूँ तेरे ज़िक्र पे ये आँखें नाम हो जाती है
क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है
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