सागर में खुद को डुबो के चाहा, तेरे दर्द से उबर जाये हम,
सागर भी तेरे दर्द के आगे कम था, ऐ मेरे मौला अब किधर जाये हम,
इस कदर तुझमे समां गयी थी मेरी ज़िन्दगी,
यहाँ भी तुम थे, मेरे लिए वहां भी तुम थे,
तेरे बगैर क्या होगा मेरा, मेरे हमदर्द,
मेरी ज़मीं भी तुम थे, मेरे आसमां भी तुम थे,
मेरे हर दिन, हर रात, हर बात तुमसे थी,
मेरा दर्द भी तुम थे, मेरी दवा भी तुम थे,
तेरी वफ़ा पे नाज़ था, तेरी बेवफाई ने दिल तोड़ दिया,
बावफा भी तुम थे, बेवफा भी तुम थे,
अब तो तेरा चेहरा भी भूलने लगा है,
इश्क करने की यह कैसी सजा है,
हमेशा चाहा तू मेरे साथ रहे हरदम,
पर जाने क्यूँ तू मुझसे जुदा है,
ऐ खुदा मेरा माही लौटा दे मुझे,
कम से कम मेरा माही मुझसे जुड़ा है,
एक अरसे से तेरी यादों में जी रहा हूँ,
दुनिया में क्या हुआ, मुझको क्या पता है,
मेरी ख़ामोशी का सबब न पूछो मुझसे,
मुझपर तेरी बेवफाई का जाम लगा है,
दिल इस कदर तेरी यादों को भूलना चाहता है,
कि तुझे भूलने के लिए भी तुझको याद करता रहा है,
और भी गम है ज़माने में मोहब्बत के सिवा,
पर यकीं जानो, मोहब्बत से बढ़कर गम कोई नहीं,
ज़िन्दगी खुशगवार होगी, तो हमदम ही हमदम होगे,
जब गम का साया होगा, तो जानोगे हमदम कोई नहीं,
No comments:
Post a Comment