कैसे लिखू मैं, और क्या लिखू मैं,
न इतने लब्ज़ हैं न ही इतना वक़्त है,
तेरे साथ गुज़रा वोह वक़्त, शायद निचोड़ है मेरी ज़िन्दगी का,
तुझे बताना है तू ही है ज़रिया मेरी हर ख़ुशी का,
कैसे कहू मैं, और क्या कहू मैं,
हाथ हाथो में लेकर घंटो बैठे रहना,
तेरी आँखों में आँखें डालकर कुछ न कहना,
तेरी हथेली की लकीरों में खोजना अपने नाम को,
सुबह की मुलाक़ात के बाद इंतज़ार करना तेरा शाम को!!!
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