Saturday, 17 September 2011

संप्रदायक अयोध्या


अयोध्या का अतीत ही जाने
मंदिर था या मस्जिद थी
पर 92 में जो भी हुआ
वो बस सियासी जिद थी

क्यों लगता है हिन्दू को
की वो खुदा से दूर है
मुसलमान की दिल में भी
भगवान भरपूर है

बेक़सूर और मज़लूमो थे वो
जो मारे गए उस काली जिद में
राम नहीं चाहते ऐसा मंदिर
खुदा भी न बसेंगे ऐसी मस्जिद में

कैसे मिलोगे अपनों से ईद
कैसे जलाओगे दिवाली में दिए
भाईचारा बनाओ राम के वास्ते
मिलजुल के रहो खुदा के लिए

भाईचारा बनाओ राम के वास्ते
मिलजुल के रहो खुदा के लिए

भाईचारा बनाओ राम के वास्ते
मिलजुल के रहो खुदा के लिए

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