Tuesday, 20 September 2016

हम एक हैं

कौन जाने फिर कहाँ हम कब मिले
रोज़ होते नहीं ये सिलसिले

आज जो मिले तो एक दूसरे में हम खो जाएं
दुनिया समझे दो है हम पर एक हम हो जाए 

मैं हूँ तू हैं , तू हैं मैं हूँ फिर क्या कमी सनम
तू है मेरा आसमां और मैं तेरी ज़मीं सनम

तेरी सांसें मेरी साँसें एक हो जाए सनम
फासले  कुछ ना रहे आ के लग जा तू गले

कौन जाने फिर कहाँ हम कब मिले
रोज़ होते ही नहीं प्यार के सिलसिले

तेरे लब और मेरे लब दोनों हैं खामोश से
तूने मुझको मैंने तुझको भर लिया आगोश में

मैं ना जानू तू ना जाने प्यार कैसे हो गया
जबसे देखा तुझको चैन दिल का खो गया

रास्ता हो कितना लंबा कितनी भी हो मुश्किलें
वादा करले आ सनम ज़िन्दगी भर संग चले

कौन जाने फिर कहाँ हम कब मिले
रोज़ होते ही नहीं ये सिलसिले

कौन जाने फिर कहाँ हम कब मिले
रोज़ होते ही नहीं ये सिलसिले

आज जो मिले तो एक दूसरे में हम खो जाएं
दुनिया समझे दो है हम पर एक हम हो जाए 


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