Tuesday, 20 September 2016

आम आदमी

वही सुबह होती है और वैसी ही शाम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है
चाहे बचपन की पढाई,जवानी का पेशा या भुढापे का सत्संग हो
अपनी ज़िन्दगी अपनी नहीं किसी और ही के नाम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है
सपने भी इतने छोटे की खुद की भी नज़र नहीं आते
फिर रोज़ की उठा पटक में बस ज़िन्दगी बदनाम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है

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