वही सुबह होती है और वैसी ही शाम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है
चाहे बचपन की पढाई,जवानी का पेशा या भुढापे का सत्संग हो
अपनी ज़िन्दगी अपनी नहीं किसी और ही के नाम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है
सपने भी इतने छोटे की खुद की भी नज़र नहीं आते
फिर रोज़ की उठा पटक में बस ज़िन्दगी बदनाम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है
चाहे बचपन की पढाई,जवानी का पेशा या भुढापे का सत्संग हो
अपनी ज़िन्दगी अपनी नहीं किसी और ही के नाम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है
सपने भी इतने छोटे की खुद की भी नज़र नहीं आते
फिर रोज़ की उठा पटक में बस ज़िन्दगी बदनाम होती है
आम आदमी की ज़िन्दगी भी बहुत आम होती है
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