Monday, 11 January 2016

Doreamon

Come On Come On
I am Doreamon
My eyes are big, My Dress is Blue
I'm here to Help You

Friday, 5 December 2014

मेरा वज़ूद


मेरा वज़ूद, मेरा निशाँ
मेरी हक़ीक़त मुझे ना पता
मैं कौन हूँ कोई दे बता
मेरी हक़ीक़त मुझे ना पता

बर्फ़ हूँ भाप हूँ
या फिर मैं पानी हूँ
जिस्म हूँ, रूह हूँ
फ़ानी हूँ या लाफ़ानी हूँ

ना मक़सद है ना मंज़िल
ना है मेरा कोई रास्ता
ये जमीं है मेरी या आसमाँ
कोई पता है या हूँ लापता

मेरी हकीकत कोई दे बता

कतरा कतरा टुकड़ा टुकड़ा
हर ज़मी बिक गई
आसमां में भी पता है
अब तलक नहीं कोई रास्ता
ना नगर पता ना डगर पता
रहता कहाँ है तू खुदा

मेरी हकीकत मुझे दे बता

सारी उमर ढूँढा तुझे
कुछ ना पाया मेरे खुदा
ढूंढना है तो ढूंढो
अपने अंदर ही खुदा को
अमन की ऐसी मिस्साल बने
की हर दिल में मुहब्बत का दिया हो

Thursday, 15 December 2011

ख्वाहिश

ज़िन्दगी के हर मोड़ पर एक ख्वाहिश रहती है,
खुदा बक्श दे वोह ख्वाहिश , तो एक नई ख्वाहिश जगती है,
जब कुछ नहीं था हासिल, तो सुकून था ज़िन्दगी में,
आज मक़ाम पाया है, तो भी कुछ कमी रहती है,
किस कदर ज़िन्दगी के फेर में घिरता जा रहा हूँ मै,
कहाँ से चला था, और आज कहाँ हूँ मै,

रह-रह कर याद आते है बचपन के आज़ाद दिन,
अपनापन तो है यहाँ भी, पर अपनों की कमी खलती है,
जाने किस तरह रह लेते है लोग वतन से दूर,
मेरा वतन ही मेरा दिल है, कैसे रहूँ धड़कन से दूर,

जाने क्यों घुटन से महसूस होती है इस माहौल में,
अपने हिस्से की हवा तो शायद, अपने वतन में ही रहती है,
मेरा घर, मेरा आँगन, मेरे दोस्त, वोह माँ का प्यार,
जाने इनके वास्ते कसा होगा और कितना इंतज़ार,

बहुत कुछ कमाया है तूने, पर क्या तुझे मेरी याद नहीं आती मेरी,
एक बार आकर मिल जा मुझसे, माँ की ख़ामोशी यही कहती है,
जाने क्या दे पाएंगे हम अगली पीढ़ी को विरासत में,
अपने रिवाज़ तक भूल चुके है ज़िन्दगी की जेद्दोजेहद में,
ज़िन्दगी तौ नियामत है खुदा की, बुजुर्गो ने यही सिखाया हमेशा,
अब तो ये ज़िन्दगी भी बोझ सी लगती है,






























Sunday, 18 September 2011

सिर्फ तुम

सागर में खुद को डुबो के चाहा, तेरे दर्द से उबर जाये हम,
सागर भी तेरे दर्द के आगे कम था, ऐ मेरे मौला अब किधर जाये हम,

इस कदर तुझमे समां गयी थी मेरी ज़िन्दगी,
यहाँ भी तुम थे, मेरे लिए वहां भी तुम थे,
तेरे बगैर क्या होगा मेरा, मेरे हमदर्द,
मेरी ज़मीं भी तुम थे, मेरे आसमां भी तुम थे,  
मेरे हर दिन, हर रात, हर बात तुमसे थी,  
मेरा दर्द भी तुम थे, मेरी दवा भी तुम थे,
तेरी वफ़ा पे नाज़ था, तेरी बेवफाई ने दिल तोड़ दिया,
बावफा भी तुम थे, बेवफा भी तुम थे,

अब तो तेरा चेहरा भी भूलने लगा है,
इश्क करने की यह कैसी सजा है,
हमेशा चाहा तू मेरे साथ रहे हरदम,
पर जाने क्यूँ तू मुझसे जुदा है,
ऐ खुदा मेरा माही लौटा दे मुझे,
कम से कम मेरा माही मुझसे जुड़ा है,
एक अरसे से तेरी यादों में जी रहा हूँ,
दुनिया में क्या हुआ, मुझको क्या पता है,
मेरी ख़ामोशी का सबब न पूछो मुझसे,
मुझपर तेरी बेवफाई का जाम लगा है,
दिल इस कदर तेरी यादों को भूलना चाहता है,
कि तुझे भूलने के लिए भी तुझको याद करता रहा है,

और भी गम है ज़माने में मोहब्बत के सिवा,
पर यकीं जानो, मोहब्बत से बढ़कर गम कोई नहीं,
ज़िन्दगी खुशगवार होगी, तो हमदम ही हमदम होगे,
जब गम का साया होगा, तो जानोगे हमदम कोई नहीं,





तुम...

तुम न हो तो कभी सवेरा न हो,
जो तुम न हो तो मेरी रातें नहीं,

एक पल भी मेरा ऐसा कभी न गुज़रा, 
जब तुम मुझे याद आते नहीं,

तेरी याद में दिल तड़पता तो है,
पर पता है मुझे, मिलना हैं हमे एक दिन,
तेरा एहसास, तेरी याद, तेरी बातें, मरी हिम्मत हैं,
वरना एक एक दिन, साल सा हैं तेरे बिन,

जो चाहा वोह सब मिला, बस तेरे साथ के सिवा,
क्यों ऐसा है कि अपनी मुलाकाते नहीं,

जो तुम न हो तो मेरी रातें नहीं,



  

मोहब्बत

करीब रहकर भी हमारे दरमियाँ फासला है मीलों लम्बा
क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है
जब किसी को मिल जाता है उसका खुदा, तो आप ही बताइए हुज़ूर
क्या उसकी इबादत कम हो जाती है

क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है

हम ही क्यों न जान पाए मोहब्बत की ताक़त को
सुना था मोहब्बत के आगे हुकूमत कम हो जाती है

क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है

अब तो कोई रिश्ता न रहा तेरे मेरे दरमियाँ 
फिर भी क्यूँ तेरे ज़िक्र पे ये आँखें नाम हो जाती है

क्या साथ रहते रहते मोहब्बत कम हो जाती है

क्या लिखू, क्या कहू...

कैसे लिखू मैं, और क्या लिखू मैं,
न इतने लब्ज़ हैं न ही इतना वक़्त है,

तेरे साथ गुज़रा वोह वक़्त, शायद निचोड़ है मेरी ज़िन्दगी का,
तुझे बताना है तू ही है ज़रिया मेरी हर ख़ुशी का,

कैसे कहू मैं, और क्या कहू मैं,

हाथ हाथो में लेकर घंटो बैठे रहना,
तेरी आँखों में आँखें डालकर कुछ न कहना,

तेरी हथेली की लकीरों में खोजना अपने नाम को,
सुबह की मुलाक़ात के बाद इंतज़ार करना तेरा शाम को!!!