Friday, 5 December 2014

मेरा वज़ूद


मेरा वज़ूद, मेरा निशाँ
मेरी हक़ीक़त मुझे ना पता
मैं कौन हूँ कोई दे बता
मेरी हक़ीक़त मुझे ना पता

बर्फ़ हूँ भाप हूँ
या फिर मैं पानी हूँ
जिस्म हूँ, रूह हूँ
फ़ानी हूँ या लाफ़ानी हूँ

ना मक़सद है ना मंज़िल
ना है मेरा कोई रास्ता
ये जमीं है मेरी या आसमाँ
कोई पता है या हूँ लापता

मेरी हकीकत कोई दे बता

कतरा कतरा टुकड़ा टुकड़ा
हर ज़मी बिक गई
आसमां में भी पता है
अब तलक नहीं कोई रास्ता
ना नगर पता ना डगर पता
रहता कहाँ है तू खुदा

मेरी हकीकत मुझे दे बता

सारी उमर ढूँढा तुझे
कुछ ना पाया मेरे खुदा
ढूंढना है तो ढूंढो
अपने अंदर ही खुदा को
अमन की ऐसी मिस्साल बने
की हर दिल में मुहब्बत का दिया हो